सौ बात की एक बात: पश्चिम एशिया में हालात सुधरने की उम्मीद जगी थी. होर्मुज स्ट्रेट के ओपन होने की संभावनाएं भी बढ़ी थीं. लाल सागर का गेटवे कहे जाने वाले बाब अल-मंदेब से तेल और गैस का प्रवाह और बढ़ाने की बात भी होने लगी थी. लेकिन पिछले तकरीबन 1 महीने में सबकुछ बदल गया. होर्मुज जहाजों के आवागमन के लिए फिर से बंद हो गया. बाब अल-मंदेब में भी खतरा बढ़ गया है. अब सऊदी अरब के 1200 किलोमीटर लंबे पाइपलाइन पर अटैक ने तेल के खेल को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है.

सऊदी अरब के ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर अटैक ने तेल संकट को नए सिरे से सामने ला दिया है. पाइपलाइन पर अटैक की सैटेलाइट तस्वीरें तबाही का आलम बता रही हैं. (फोटो: Reuters)
सौ बात की एक बात ये कि एक पाइपलाइन पर हमले ने पूरी दुनिया को हिला दिया है. और कोई बोल भी नहीं रहा कि हमला उसने किया है, कोई जिम्मेदारी ही नहीं ले रहा. लेकिन इतना जरूर है कि हुआ ये उसी युद्ध की वजह से है जो अमेरिका ने ईरान पर छेड़ा था. ईरान की रणनीति ही यही थी कि दुनिया में तेल की मारामारी होगी तो दुनिया अमेरिका को रोकेगी. इसलिए उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को रोका था. लेकिन थोड़ी मारामारी के बाद तेल का मामला थोड़ा-बहुत कंट्रोल में आता लग रहा था सबको. तो ईरान को वो प्रेशर उतना कारगर नहीं हो पा रहा था. लेकिन अब जो हुआ है उससे दुनिया में कच्चे तेल के बाजार में फिर आग लग गई है. भारत में अभी पता नहीं चल रहा पब्लिक को क्योंकि यहां तो अभी पेट्रोल-डीजल के दाम वही बना कर रखे हैं तेल कंपनियों ने जितने पिछले कुछ दिनों से थे. लेकिन माहौल बदलता जा रहा है दुनिया भर में.
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में जो कच्चा तेल ईरान युद्ध के बाद भी 80-90 डॉलर प्रति बैरल के रेट पर चल रहा था, वो अब 100 डॉलर के ऊपर ही बना हुआ है और 108-110 डॉलर को भी छू चुका है. यानी कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. और दुनिया भर में डीजल और पेट्रोल और महंगे होने का डर फिर से छा गया है. और ये जो अभी हुआ है वो क्यों हुआ है? ईरान युद्ध तो फिर भड़क ही रहा है. हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर हमले किए ही हुए हैं. लेकिन जो सबसी बड़ी घटना हुई है जिसपर सबको ध्यान देने की जरूरत है वो ये कि सऊदी अरब की अपनी वो पाइपलाइन बंद करनी पड़ गई है जो उसकी ही नहीं, एक तरह से दुनिया की लाइफलाइन बन गई थी
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